सोमवार, 6 सितंबर 2010

दाने की तलाश में चिड़िया

पत्ते प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं जब जड़ों से
तब फसलें नहीं उगतीं
सवाल उबलते हैं खेत की आँखों में
बादल आते हैं गीले कपड़ों की शक्ल में
भेड़ों से बारिश का पता पूछते हुए
नदियों से डरने लगती हैं मछलियाँ
जंगल की डरावनी कहानियां सुनाने लगते हैं
रेत पर हवा के पैरों के निशान
सूखे तालाबों के संगठित आन्दोलन
फैसले करने लगते हैं बाढ़ के खिलाफ
दाने की तलाश में उड़ती चिड़िया
लड़ने लगती है युद्ध भूख के पक्ष में
विरोध की आवाज़ का गला काटने की
योजनाएं बनाने लगते हैं सियार
घास का हरापन फिर भी बचाना चाहता है अपने को
ताकि ज़िंदा रहें गीतों के बोल
बंजारों की बस्तियों में |